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मानसून में फंगल इन्फेक्शन और त्वचा की समस्याएं: बचाव, देखभाल और होम्योपैथी की पारंपरिक भूमिका

July 6, 2026 · Dr. Ajay Mehra

बरसात का मौसम आते ही गर्मी से राहत तो मिलती है, लेकिन साथ में आती हैं त्वचा की कई परेशानियां। मानसून में फंगल इन्फेक्शन सबसे आम शिकायत है — दाद, खुजली, उंगलियों के बीच की त्वचा का गलना, घमौरियां और पसीने से होने वाले दाने। हरियाणा में जुलाई-अगस्त की उमस में ये समस्याएं और बढ़ जाती हैं। सफीदों और आसपास के इलाकों से हमारे क्लिनिक में इन दिनों सबसे ज्यादा मरीज इन्हीं शिकायतों के साथ आते हैं। इस लेख में जानिए कि बरसात में त्वचा की समस्या क्यों बढ़ती है, बचाव के आसान तरीके क्या हैं, और होम्योपैथी में इन शिकायतों को पारंपरिक रूप से कैसे देखा जाता है।

मानसून में त्वचा की समस्याएं क्यों बढ़ती हैं?

फंगस (कवक) को पनपने के लिए दो चीजें चाहिए — नमी और गर्मी। मानसून में दोनों भरपूर मिलती हैं। पसीना सूखता नहीं, कपड़े देर तक गीले रहते हैं, और हवा में नमी 80-90% तक पहुंच जाती है। इसी वजह से ये शिकायतें आम हो जाती हैं:

  • दाद (रिंगवर्म): गोल, लाल, खुजली वाले चकत्ते — अक्सर जांघ, कमर, गर्दन या बगल में।
  • उंगलियों के बीच इन्फेक्शन: गीले जूते-मोजे पहनने से पैर की उंगलियों के बीच की त्वचा सफेद होकर गलने लगती है।
  • घमौरियां: पसीने की ग्रंथियां बंद होने से छोटे-छोटे लाल दाने, खासकर पीठ और गर्दन पर।
  • खुजली और रैशेज: सिंथेटिक या टाइट कपड़ों से रगड़ वाली जगहों पर।
  • पुरानी समस्याओं का बढ़ना: जिन लोगों को पहले से एक्जिमा या सोरायसिस है, उनकी तकलीफ भी इस मौसम में अक्सर बढ़ जाती है। (एक्जिमा-सोरायसिस के बारे में विस्तार से हमारे सोरायसिस और एक्जिमा पेज पर पढ़ें।)

बचाव के 8 आसान तरीके

अच्छी बात यह है कि मानसून की ज्यादातर त्वचा समस्याओं से थोड़ी सी सावधानी से बचा जा सकता है:

  1. त्वचा को सूखा रखें। नहाने के बाद उंगलियों के बीच, कमर और बगल को अच्छी तरह पोंछें। नमी ही फंगस का घर है।
  2. सूती और ढीले कपड़े पहनें। सिंथेटिक कपड़े पसीना रोकते हैं। सूती कपड़े हवा लगने देते हैं।
  3. गीले कपड़े तुरंत बदलें। बारिश में भीगने के बाद जितनी जल्दी हो सके नहाकर सूखे कपड़े पहनें।
  4. जूते-मोजे रोज बदलें। गीले जूते अगले दिन न पहनें। हो सके तो बरसात में खुली सैंडल या फ्लोटर्स पहनें।
  5. तौलिया, कंघी, कपड़े साझा न करें। दाद एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है।
  6. खुजलाने से बचें। खुजलाने से इन्फेक्शन हाथों के जरिए शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल सकता है।
  7. हल्का, ताजा खाना खाएं। बरसात में पाचन धीमा रहता है। बहुत तला-भुना और बासी खाना त्वचा की सेहत पर भी असर डाल सकता है।
  8. पसीने के बाद स्नान। खेत, दुकान या बाहर के काम से लौटकर पसीना सूखने का इंतजार न करें — धोकर सुखा लें।

घरेलू स्तर पर क्या ध्यान रखें?

लोक-परंपरा में नीम के पत्तों के पानी से स्नान, हल्दी का लेप और नारियल तेल जैसी चीजें त्वचा की देखभाल के लिए इस्तेमाल होती आई हैं। ये परंपरागत उपाय स्वच्छता और आराम में मददगार माने जाते हैं, लेकिन ध्यान रखें — अगर दाद या खुजली फैल रही हो, बार-बार लौट रही हो, या 4-5 दिन में आराम न मिले, तो घरेलू उपायों के भरोसे न रहें और किसी योग्य डॉक्टर से जांच कराएं। अधूरा या गलत इलाज दाद को जिद्दी बना सकता है।

होम्योपैथी में त्वचा की शिकायतों को कैसे देखा जाता है?

होम्योपैथी की पारंपरिक पद्धति में त्वचा की शिकायत को सिर्फ ऊपरी समस्या नहीं माना जाता। डॉक्टर मरीज की पूरी जानकारी लेते हैं — खुजली कब बढ़ती है, पसीना कैसा आता है, खान-पान, नींद, और पुरानी बीमारियों का इतिहास। इसी आधार पर हर व्यक्ति के लिए दवा का चुनाव अलग-अलग होता है।

पारंपरिक होम्योपैथिक साहित्य में त्वचा की शिकायतों के लिए सल्फर, ग्रेफाइटिस, सीपिया और टेल्यूरियम जैसी दवाओं का उल्लेख मिलता है, जिन्हें पुराने समय से होम्योपैथिक चिकित्सक अपने अनुभव के आधार पर चुनते आए हैं। यह समझना जरूरी है कि इन दवाओं का असर वैज्ञानिक शोध में पूरी तरह प्रमाणित नहीं है — यह जानकारी पारंपरिक उपयोग और होम्योपैथिक पद्धति के दृष्टिकोण पर आधारित है। कौन सी दवा किसके लिए उपयुक्त है, यह केवल योग्य होम्योपैथिक चिकित्सक ही तय कर सकते हैं — खुद से दवा लेना ठीक नहीं।

त्वचा की पुरानी और बार-बार लौटने वाली समस्याओं पर हमारी विस्तृत जानकारी स्किन ट्रीटमेंट पेज पर उपलब्ध है।

डॉक्टर से कब मिलें?

  • दाद या चकत्ते शरीर के कई हिस्सों में फैल रहे हों
  • खुजली की वजह से नींद खराब हो रही हो
  • त्वचा से पानी या मवाद निकल रहा हो
  • शुगर (डायबिटीज) के मरीजों में कोई भी त्वचा इन्फेक्शन — क्योंकि उनमें इन्फेक्शन जल्दी बढ़ सकता है
  • बच्चों के सिर में खुजली और बाल झड़ने वाले गोल चकत्ते

सफीदों में परामर्श

RN Homeopathy & Skin Clinic, सफीदों (बंसल हॉस्पिटल के पास, एमजी रोड) में डॉ. अजय मेहरा (BHMS, PGIMS रोहतक) त्वचा, एलर्जी और पुरानी बीमारियों के मरीजों को परामर्श देते हैं। अपॉइंटमेंट के लिए संपर्क पेज देखें या WhatsApp करें। अन्य बीमारियों की जानकारी के लिए हमारा रोग-देखभाल पेज देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या दाद अपने आप ठीक हो जाता है?

कई बार हल्का इन्फेक्शन साफ-सफाई से ठीक हो जाता है, लेकिन दाद अक्सर जिद्दी होता है और अधूरी देखभाल से बार-बार लौटता है। न फैले, इसके लिए समय पर डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है।

क्या बरसात में रोज नहाना चाहिए?

हां — बल्कि पसीना ज्यादा आए तो दिन में दो बार भी नहा सकते हैं। जरूरी बात नहाने के बाद शरीर को पूरी तरह सुखाना है।

घमौरियों में क्या करें?

ठंडे पानी से स्नान, सूती ढीले कपड़े और धूप-उमस से बचाव — ज्यादातर घमौरियां इसी से शांत हो जाती हैं। न ठीक हों तो डॉक्टर को दिखाएं।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, चिकित्सा सलाह नहीं है। होम्योपैथिक दवाओं का उल्लेख पारंपरिक उपयोग के आधार पर किया गया है; किसी भी बीमारी के इलाज, रोकथाम या ठीक होने का दावा नहीं किया जाता। कोई भी उपचार शुरू करने से पहले योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।